सुप्रीम कोर्ट पहुंचा INDIA ब्लॉक, SIR पर रोक और रिटायर्ड जज से ऑडिट की मांग
नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और INDIA ब्लॉक के नौ अन्य नेताओं ने सोमवार को संयुक्त याचिका दायर कर इस प्रक्रिया को चुनौती दी। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि SIR पर तत्काल रोक लगाई जाए और पूरी प्रक्रिया की जांच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली समिति से कराई जाए।
याचिका में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दूसरे चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना कई अहम फैसले एकतरफा और मनमाने ढंग से लिए। हालांकि, ये आरोप याचिकाकर्ताओं के दावे हैं, जिन पर अदालत का फैसला आना बाकी है।
SIR पर तत्काल रोक लगाने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि इस प्रक्रिया के खिलाफ लंबित सभी याचिकाओं पर फैसला आने तक SIR को स्थगित किया जाए। उनका कहना है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
याचिका में अदालत से बूथवार आंकड़े मंगाने और यह पता लगाने की मांग की गई है कि कितने मतदाताओं के नाम हटाए गए और इसके पीछे क्या कारण थे। विपक्षी नेताओं ने कहा है कि जिन मतदाताओं के नाम मनमाने तरीके से हटाए गए हैं, उन्हें बहाल करने के लिए भी कदम उठाए जाने चाहिए।
इस मांग का केंद्र मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार से जुड़ा सवाल है। हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोपों और वास्तविक अनियमितताओं के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक आंकड़ों तथा दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी।
Form 6 में बदलाव पर भी उठाए सवाल
याचिका में फॉर्म 6 में किए गए बदलावों को भी चुनौती दी गई है। इस फॉर्म का इस्तेमाल नए मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन करने में होता है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, संशोधित फॉर्म 6 में नए आवेदकों से यह बताने की अनिवार्यता जोड़ी गई है कि उनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम दो दशक से अधिक पहले हुई SIR प्रक्रिया में दर्ज था या नहीं।
विपक्षी नेताओं ने इस बदलाव पर सवाल उठाते हुए इसके औचित्य और नए मतदाताओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव की जांच की मांग की है। इस प्रावधान को लेकर विवाद का एक प्रमुख पहलू यह है कि पुराने रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी जुटाने में आवेदकों को किन व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में बने समिति
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से एक ऐसी समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है, जिसकी अध्यक्षता शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश करें। समिति को SIR प्रक्रिया का विस्तृत ऑडिट करने और मतदाता सूची से नाम हटाने के फैसलों की जांच करने का प्रस्ताव दिया गया है।
प्रस्तावित समिति को बूथवार नाम कटने के आंकड़ों, प्रत्येक मामले में नाम हटाने के कारणों और अपनाई गई प्रक्रिया की समीक्षा करनी चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा है कि जांच में यदि मनमाने ढंग से नाम हटाए जाने के मामले सामने आते हैं, तो प्रभावित मतदाताओं के नाम बहाल किए जाएं।
चुनाव आयोग से रिकॉर्ड तलब करने की अपील
विपक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट से निर्वाचन आयोग के संबंधित रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश देने की मांग की है। इनमें आयोग की बैठकों के मिनट्स, आंतरिक टिप्पणियां और दूसरे दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियां शामिल हैं।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, इन दस्तावेजों से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि SIR से जुड़े फैसले किस प्रक्रिया के तहत लिए गए और क्या उनमें सभी संबंधित अधिकारियों की सहमति थी।
इन रिकॉर्डों की उपलब्धता और उनकी जांच मामले की सुनवाई में अहम भूमिका निभा सकती है। फिलहाल, याचिका में उठाए गए सवालों पर अदालत की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
किन नेताओं ने दाखिल की याचिका?
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के अलावा याचिका दाखिल करने वालों में तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल के तेजस्वी यादव, शिवसेना (UBT) के संजय राउत, माकपा के एम.ए. बेबी, भाकपा के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, शरद पवार गुट की एनसीपी की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ई.टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं।
इससे पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राहुल गांधी और खड़गे को इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दाखिल करने की अनुमति दी थी। हालांकि, उन्होंने इस विषय पर ज्ञापन सौंपने के लिए व्यक्तिगत मुलाकात की मांग स्वीकार नहीं की थी।
मंगलवार की सुनवाई पर नजर
याचिका पर मंगलवार को सुनवाई होने की संभावना जताई गई है। इसके साथ उन अन्य याचिकाओं पर भी सुनवाई हो सकती है, जिनमें दिल्ली में ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर हो रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर लगाए गए प्रतिबंध वापस लेने की मांग की गई है।
अब अदालत के सामने SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची से नाम हटाने के आधार और निर्वाचन आयोग के फैसलों से जुड़े सवाल होंगे। सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हो सकता है कि अदालत रिकॉर्ड तलब करने, स्वतंत्र ऑडिट कराने या प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
फिलहाल, मामले का अगला चरण न्यायिक सुनवाई पर निर्भर है।

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