दिल्ली में SIR के खिलाफ INDIA गठबंधन का मार्च, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा वोटर लिस्ट विवाद
नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ सोमवार को दिल्ली में विपक्षी INDIA गठबंधन के नेताओं और नागरिकों ने मार्च निकाला। प्रदर्शनकारी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ कानूनी लड़ाई का संदेश दिया। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सत्यापन की इस प्रक्रिया से देशभर में बड़ी संख्या में पात्र मतदाता प्रभावित हुए हैं। हालांकि, इन आरोपों और प्रक्रिया के वास्तविक प्रभाव का आकलन आधिकारिक आंकड़ों तथा कानूनी सुनवाई के आधार पर किया जाना बाकी है।
‘दिल्ली चलो’ नाम से आयोजित इस मार्च में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, वामपंथी संगठनों और अन्य विपक्षी समूहों के कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन में राजनीतिक नेताओं के अलावा छात्र, उदारवादी विचारधारा से जुड़े लोग और दफ्तरों से निकले कर्मचारी भी दिखाई दिए। मार्च का माहौल किसी छात्र संगठन की विजय रैली जैसा था। युवाओं ने ढोल बजाए, कुछ प्रतिभागियों ने बैटमैन के मुखौटे पहने और धार्मिक लोगों ने शंख बजाकर विरोध दर्ज कराया।
संविधान क्लब में जुटे विपक्षी नेता
मार्च से पहले विपक्षी नेताओं ने संविधान क्लब में बैठक की। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई नेता शामिल हुए।
बिहार में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव और INDIA गठबंधन के अन्य प्रतिनिधियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया। वामपंथी छात्र संगठनों SFI और AISA की नेताओं आइशी घोष और नेहा बोरा को भी आमंत्रित किया गया था।
बैठक के बाद ममता बनर्जी कोलकाता के लिए रवाना हो गईं। अन्य नेता और कार्यकर्ता बसों के काफिले से कनॉट प्लेस स्थित स्टेट्समैन हाउस पहुंचे। यहां समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी समूह में शामिल हुए।
मार्च शाम करीब 4:30 बजे शुरू हुआ। इसी दौरान कांग्रेस की कानूनी टीम सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया में जुटी थी।
पुलिस बैरिकेडिंग के बीच आगे बढ़ा मार्च
प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेड लगाए थे। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के सामने पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच लंबा गतिरोध हुआ। कांग्रेस नेताओं कन्हैया कुमार, अनुपम और अंशुल त्रिवेदी ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें पीछे धकेल दिया।
इसके बाद बस को कॉपरनिकस मार्ग की ओर मोड़ दिया गया। कुछ सांसद बस में ही रहे, जबकि कुछ समर्थकों का अभिवादन करने के लिए ट्रक पर चढ़े। अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज भी प्रदर्शन में मौजूद थे। वह उन लोगों में शामिल थे, जो पिछले सप्ताहांत जंतर-मंतर पर पुलिस के घेरे के बावजूद विरोध प्रदर्शन में पहुंच पाए थे।
बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी.जी. कोलसे पाटिल ने प्रदर्शन को अदालत के लिए एक संदेश बताया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों का न्याय की मांग करते हुए अदालत तक पहुंचना अपने आप में अहम है।
कोलसे पाटिल ने पिछले सप्ताहांत प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, उन्होंने अपने जीवन में दिल्ली में कई प्रदर्शन देखे हैं, लेकिन उस दौरान हुई कार्रवाई जैसी कठोर स्थिति कम ही देखी।
सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई का ऐलान
राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, खरगे और तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत राय समेत कई नेता सुप्रीम कोर्ट परिसर पहुंचे। वे अदालत की रजिस्ट्री तक गए। इसके बाद खरगे ने पत्रकारों से कहा कि विपक्ष कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ पूरी ताकत से कानूनी लड़ाई लड़ेगा।
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि चुनाव में कौन जीतता है, इससे विपक्ष को समस्या नहीं है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों पर आपत्ति है।
हालांकि, INDIA गठबंधन की ओर से दिल्ली में आगे किसी संयुक्त प्रदर्शन की तत्काल घोषणा नहीं की गई थी। राहुल गांधी ने मार्च से पहले कहा कि यह आंदोलन किसी सख्त योजना के तहत नहीं चल रहा। उन्होंने इसकी तुलना भगवान शिव की बारात से की, जिसमें सभी का स्वागत है, बशर्ते वे संविधान के मूल सिद्धांतों का सम्मान करें।
BJP ने विपक्ष के आरोपों को किया खारिज
केंद्र सरकार और भाजपा ने विपक्ष के प्रदर्शन पर सवाल उठाए। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया मंच X पर कहा कि विरोध करना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल निंदनीय है।
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए उनके बयानों और विरोध प्रदर्शन को खोखला बताया। इस तरह SIR को लेकर राजनीतिक टकराव सड़क से लेकर संसद और अदालत तक पहुंच गया।
इसी बीच, आम आदमी पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग करते हुए जनपथ पर अलग प्रदर्शन किया। पार्टी सांसद संजय सिंह और दिल्ली इकाई के प्रमुख सौरभ भारद्वाज को पुलिस ने हिरासत में लिया। AAP ने पूरे सप्ताह विरोध प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की।
SIR विवाद पर अब अदालत की नजर
दिल्ली का यह मार्च मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष की बढ़ती राजनीतिक और कानूनी चुनौती को दिखाता है। विपक्ष इसे पात्र मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, जबकि भाजपा ने उसके आरोपों और आंदोलन के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
अब इस विवाद में अदालत की कार्यवाही, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सत्यापित आंकड़े अहम होंगे। फिलहाल राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अंतिम निष्कर्ष तथ्यों और कानूनी परीक्षण के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।

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