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Rupee Recovery: RBI Ke Kadam Se Dollar Ke Mukable 95.80 Par Pahunchi Indian Currency

 

भारतीय रुपये ने सोमवार, 12 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले 91 पैसे की मजबूत वापसी करते हुए 95.80 का स्तर छू लिया। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव और रुपये पर बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के लिए नए कदम उठाए जाने के बाद यह सुधार देखने को मिला।

शुक्रवार को रुपया डॉलर के मुकाबले 96.71 पर बंद हुआ था, जबकि इससे एक दिन पहले यह 96.88 के रिकॉर्ड निचले बंद स्तर तक गिर गया था। RBI के नए नियमों का मकसद डॉलर की हाजिर बाजार में मांग कम करना और मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी पर लगाम लगाना है। हालांकि, महंगे कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच रुपये की मजबूती कितनी टिकाऊ होगी, इस पर बाजार की नजर बनी हुई है।

RBI के नए नियम: डॉलर की मांग घटाने की कोशिश

भारतीय रिजर्व बैंक ने शनिवार, 10 अक्टूबर को विदेशी मुद्रा बाजार में अनुशासन बढ़ाने के लिए कई उपायों की घोषणा की। इनमें तेल विपणन कंपनियों के लिए निर्धारित बैंकों के माध्यम से डॉलर उपलब्ध कराने की विशेष व्यवस्था भी शामिल है।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। तेल की कीमतें बढ़ने पर भारतीय कंपनियों को भुगतान के लिए अधिक डॉलर खरीदने पड़ते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव पड़ सकता है।

RBI की नई व्यवस्था का उद्देश्य तेल कंपनियों की डॉलर संबंधी जरूरतों को अलग माध्यम से पूरा करके हाजिर बाजार में अचानक बढ़ने वाली मांग को कम करना है।

केंद्रीय बैंक ने रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर भी सख्ती की है। नए नियमों के तहत अधिकृत डीलर अब रद्द किए गए रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों को दोबारा बुक करने की अनुमति नहीं दे सकेंगे। हालांकि, मौजूदा नियमों के अधीन परिपक्वता पर अनुबंध को आगे बढ़ाने की अनुमति जारी रहेगी।

इसके अलावा, बिना वास्तविक कारोबारी जरूरत से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के लिए निर्धारित सीमा 10 करोड़ डॉलर से घटाकर 50 लाख डॉलर कर दी गई है। यह बदलाव अधिकृत डीलरों और मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर लागू होगा।

RBI ने 20 प्रतिशत का विदेशी मुद्रा जोखिम रिजर्व (FERR) भी लागू किया है। इसके तहत निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले 20 लाख डॉलर से अधिक के रुपये-आधारित डेरिवेटिव अनुबंधों पर अधिकृत डीलरों को संबंधित काल्पनिक राशि के रुपये समतुल्य का 20 प्रतिशत नकद रिजर्व केंद्रीय बैंक के पास रखना होगा। यह प्रावधान चालू खाते के उन जोखिमों से बचाव के लिए किए गए सौदों पर लागू होता है, जिनमें रुपये के बदले विदेशी मुद्रा खरीदी जाती है।

महंगा कच्चा तेल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी चुनौती

सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर इंडेक्स 0.08 प्रतिशत गिरकर 101.94 पर कारोबार कर रहा था। यह इंडेक्स छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापता है।

ब्रेंट क्रूड वायदा 1.54 प्रतिशत गिरकर 103.11 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, लेकिन कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर थीं। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। महंगे तेल से आयात बिल बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव बना रह सकता है।

घरेलू शेयर बाजार में भी कारोबार मिला-जुला रहा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 20 अंक गिरकर 72,452.33 पर था, जबकि निफ्टी 7.95 अंक बढ़कर 22,529.85 पर कारोबार कर रहा था।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार से शुद्ध आधार पर 3,568.90 करोड़ रुपये की निकासी की थी। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से डॉलर की मांग बढ़ सकती है, खासकर जब निवेशक भारतीय संपत्तियों से पैसा निकालकर विदेशी बाजारों में लगाते हैं।

विदेशी मुद्रा भंडार में भी आई बड़ी गिरावट

RBI के शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, 2 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 12.952 अरब डॉलर घटकर 734.606 अरब डॉलर रह गया।

इससे पिछले सप्ताह, 25 सितंबर को समाप्त अवधि में भी विदेशी मुद्रा भंडार 18.343 अरब डॉलर गिरकर 747.557 अरब डॉलर पर आ गया था।

विदेशी मुद्रा भंडार में बदलाव के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें डॉलर के मुकाबले अन्य मुद्राओं के मूल्यांकन में बदलाव और केंद्रीय बैंक की गतिविधियां शामिल हैं। इसलिए केवल एक सप्ताह की गिरावट से यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि RBI ने रुपये को संभालने के लिए उतनी ही राशि खर्च की है।

फिर भी, लगातार दो सप्ताह की बड़ी गिरावट बाजार के लिए निगरानी का विषय है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार आमतौर पर बाहरी भुगतान संबंधी जरूरतों को पूरा करने और अचानक आने वाले आर्थिक झटकों से निपटने में मदद करता है।

रुपये की मजबूती के बाद अब आगे क्या?

सोमवार की शुरुआती तेजी रुपये के लिए राहत जरूर है, लेकिन इसे स्थायी सुधार मानना जल्दबाजी होगी। RBI के नए नियम मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी कम करने और डॉलर की मांग को व्यवस्थित करने में मदद कर सकते हैं। दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी डॉलर की चाल और विदेशी निवेशकों का रुख रुपये की दिशा तय करने में अहम रहेंगे।

आने वाले सत्रों में बाजार यह देखेगा कि रुपये की तेजी बरकरार रहती है या आयातकों की डॉलर मांग और वैश्विक दबाव फिर बढ़ते हैं।

मुख्य बातें:

  • रुपया शुरुआती कारोबार में 91 पैसे मजबूत होकर 95.80 प्रति डॉलर पर पहुंचा।

  • RBI ने तेल कंपनियों के लिए विशेष डॉलर व्यवस्था और विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर सख्त नियम लागू किए।

  • ब्रेंट क्रूड 103.11 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

  • 2 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 12.952 अरब डॉलर घटकर 734.606 अरब डॉलर रह गया।

क्या RBI के नए कदम रुपये को लंबे समय तक स्थिर रखने में सफल होंगे, या महंगा कच्चा तेल फिर दबाव बढ़ाएगा? अपनी राय साझा करें।

Disclaimer

यह रिपोर्ट उपलब्ध समाचार सामग्री और संबंधित बाजार आंकड़ों पर आधारित है; बाजार संबंधी आंकड़े बदल सकते हैं और पाठकों को निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए।

SRA
Ajay Kumar
Founder & Chief Editor • Story Real A

Investigative journalist and founder of Story Real A, focusing on public policy, national socioeconomic developments, governance, and grassroots reporting across India.

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