शेयर बाजार में लौटी तेजी, Sensex 1,109 अंक उछला; निवेशकों की संपत्ति में ₹4 लाख करोड़ का इजाफा
भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जोरदार वापसी देखने को मिली। लगातार गिरावट के बाद निवेशकों को राहत मिली और बीएसई सेंसेक्स तथा एनएसई निफ्टी दोनों में 1.5 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। आईटी शेयरों में खरीदारी, रुपये की मजबूती, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की कैपिटल गेन टैक्स पर टिप्पणी ने बाजार के माहौल को सहारा दिया।
कारोबार के अंत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,109.10 अंक यानी 1.54 फीसदी चढ़कर 73,033.78 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में यह 1,120.99 अंक उछलकर 73,045.67 के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया।
दूसरी ओर, एनएसई निफ्टी 358.60 अंक यानी करीब 1.6 फीसदी की बढ़त के साथ 22,721.95 पर बंद हुआ। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सुधार देखने को मिला। दिनभर के कारोबार के बाद निवेशकों की कुल संपत्ति में करीब ₹4 लाख करोड़ की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
IT Stocks में सबसे ज्यादा खरीदारी
बाजार की तेजी में आईटी कंपनियों के शेयरों की बड़ी भूमिका रही। मजबूत तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों ने इस सेक्टर में खरीदारी की। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण आईटी कंपनियों के भविष्य को लेकर बनी चिंताओं के बीच बेहतर नतीजों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर 8.28 फीसदी उछला। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में 6.59 फीसदी की तेजी आई, जबकि टेक महिंद्रा 4.90 फीसदी और इंफोसिस 4.44 फीसदी चढ़ा।
आईटी के अलावा हिंदुस्तान यूनिलीवर, टाइटन, बजाज फिनसर्व, भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा और आईसीआईसीआई बैंक के शेयरों में भी बढ़त दर्ज की गई।
आईटी शेयरों में आई खरीदारी ने बाजार को ऊपर खींचने में मदद की। हालांकि, एक दिन की तेजी से पूरे सेक्टर की दीर्घकालिक चुनौतियां खत्म नहीं होतीं।
निर्मला सीतारमण के बयान से क्यों बढ़ी उम्मीद?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स और सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) पर चल रही बहस का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर चर्चा होना स्वस्थ है और वह इस पर उठने वाले विचारों को सुनने के लिए तैयार हैं।
शेयर बाजार के निवेशकों ने इस टिप्पणी को ध्यान से लिया। कुछ निवेशकों को उम्मीद दिखी कि भविष्य में कैपिटल गेन टैक्स और अलग-अलग एसेट क्लास पर टैक्स व्यवस्था को लेकर राहत की संभावना पर चर्चा हो सकती है।
हालांकि, वित्त मंत्री के बयान में किसी टैक्स कटौती या तत्काल बदलाव की घोषणा नहीं की गई। इसलिए इसे संभावित नीतिगत चर्चा के संकेत के रूप में ही देखना चाहिए, न कि टैक्स में राहत के पक्के वादे के तौर पर।
रुपये की मजबूती से बाजार को सहारा
भारतीय रुपया लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में मजबूत हुआ। मंगलवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 40 पैसे चढ़कर 95.38 प्रति डॉलर के अस्थायी स्तर पर बंद हुआ।
विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रिजर्व बैंक के कदमों से डॉलर की मांग और बाजार में अत्यधिक पोजिशनिंग को नियंत्रित करने में मदद मिलने की बात सामने आई। रुपये में सुधार से आयात पर निर्भर कंपनियों को संभावित राहत मिल सकती है, हालांकि इसका असर अलग-अलग कंपनियों पर उनकी लागत और कारोबारी स्थिति के अनुसार बदलता है।
फिर भी, डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। विदेशी निवेश, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां आगे भी इसकी दिशा तय करने वाले कारक होंगे।
IMF का अनुमान और कच्चे तेल की कीमतें
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7 फीसदी रहने का अनुमान जताया और देश को प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बताया। इस अनुमान से घरेलू अर्थव्यवस्था को लेकर निवेशकों की धारणा को समर्थन मिला।
उधर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 1.65 फीसदी गिरकर 104.89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई। इससे पहले पिछले सत्र में तेल की कीमतों में करीब 2 डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी।
तेल की कीमतों में नरमी भारत के लिए राहत का संकेत हो सकती है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। महंगा कच्चा तेल आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकता है। हालांकि, मध्य पूर्व में तनाव के कारण तेल की कीमतें अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेत
एशियाई बाजारों में मंगलवार को मिला-जुला कारोबार रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5.46 फीसदी गिर गया, जबकि जापान का निक्केई 225 भी कमजोरी के साथ बंद हुआ। इसके विपरीत, शंघाई कंपोजिट और हैंग सेंग बढ़त के साथ बंद हुए।
अमेरिकी बाजार पिछले कारोबारी सत्र में ज्यादातर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि यूरोपीय बाजारों में तेजी रही।
आगे बाजार की नजर किन बातों पर रहेगी?
मंगलवार की तेजी ने निवेशकों को राहत जरूर दी, लेकिन बाजार की अगली दिशा कई कारकों पर निर्भर करेगी। कंपनियों के तिमाही नतीजे, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमतें और मध्य पूर्व के हालात बाजार को प्रभावित कर सकते हैं।
निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि एक मजबूत कारोबारी सत्र अपने आप में स्थायी तेजी की गारंटी नहीं है। आगे के सत्रों में खरीदारी कितनी टिकती है और प्रमुख सूचकांक अपनी बढ़त बरकरार रख पाते हैं या नहीं, इस पर बाजार की नजर रहेगी।

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