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Supreme Court March: Chunav Aayog Par Sawaal, Gyanesh Kumar Ke Istife Ki Maang

 

दिल्ली में सोमवार को हजारों विपक्षी समर्थकों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों और विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाने की प्रक्रिया चुनावी निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी ने इन आरोपों को खारिज किया है।

‘मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ नाम से आयोजित यह प्रदर्शन राजधानी में कई दिनों से जारी राजनीतिक तनाव के बीच हुआ। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए अदालत में याचिका दाखिल की। इस विवाद के केंद्र में मतदाता सूची से करोड़ों नाम हटाए जाने का मुद्दा है, जिस पर विपक्ष पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है।

राहुल गांधी की याचिका और सुप्रीम कोर्ट का रुख

मुख्य चुनाव आयुक्त पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने विपक्षी दलों, नागरिक समाज संगठनों और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोगों से मार्च में शामिल होने की अपील की थी। प्रदर्शन से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को लिखे पत्र की जानकारी साझा की।

पत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कथित आचरण और मतदाता सूची में संशोधन को लेकर चिंताएं उठाई गईं। कांग्रेस का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।

याचिका दाखिल होने के बाद मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मामला पहले से अदालत के सामने है। इसलिए न्यायिक प्रक्रिया के दौरान इस पर टिप्पणी नहीं की जा सकती। हालांकि, उन्होंने भरोसा दिलाया कि ऐसी याचिका पर कानून के अनुसार जल्द से जल्द सुनवाई की जाएगी।

अब इस मामले में अदालत की सुनवाई अहम होगी। याचिका पर आगे क्या आदेश आता है, यह तय करेगा कि विपक्ष की ओर से उठाई गई चिंताओं पर कानूनी स्तर पर किस तरह विचार किया जाता है।

मतदाता सूची संशोधन पर राजनीतिक टकराव

विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भाजपा को चुनावी लाभ मिल सकता है। यह विपक्ष का आरोप है, कोई न्यायिक रूप से स्थापित निष्कर्ष नहीं। चुनाव आयोग और भाजपा ने इन आरोपों को अस्वीकार किया है।

मतदाता सूची में नाम जोड़ना, हटाना और उनकी पुष्टि करना चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा है। लेकिन बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की स्थिति में पारदर्शिता, सही सूचना और प्रभावित मतदाताओं को शिकायत का अवसर देना अहम हो जाता है।

इस विवाद का असर केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है। मतदाता सूची से किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से हटने पर उसके मतदान के अधिकार पर सीधा असर पड़ सकता है। इसलिए संशोधन के आधार, सत्यापन की प्रक्रिया और शिकायतों के निपटारे को लेकर स्पष्ट जानकारी महत्वपूर्ण है।

दिल्ली में भारी सुरक्षा, प्रदर्शनकारियों की हिरासत

सड़कों पर बैरिकेडिंग और मेट्रो पर पाबंदियां

मार्च के दौरान मध्य दिल्ली में भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई। कई सड़कों पर बैरिकेड लगाए गए और कुछ मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश तथा निकास को लेकर प्रतिबंध लागू किए गए। राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेताओं को लेकर एक बस बाराखंबा रोड से अदालत की ओर बढ़ी।

मंडी हाउस के पास बस रुकी। राहुल गांधी और कुछ अन्य नेता बस की छत पर चढ़कर समर्थकों का अभिवादन करने लगे। हजारों लोग सड़कों पर मौजूद थे। प्रदर्शनकारियों ने झंडे लहराए, नारे लगाए और ढोल बजाकर विरोध दर्ज कराया।

एक प्रदर्शनकारी ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा कि अगर लोगों से मतदान का अधिकार छीन लिया जाए, तो उनके पास क्या बचेगा। दूसरे प्रदर्शनकारी ने इस मार्च को भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को बचाने की लड़ाई बताया।

पिछले सप्ताह राहुल गांधी समेत कई वरिष्ठ विपक्षी नेताओं को मध्य दिल्ली में प्रदर्शन का नेतृत्व करते समय कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया था।

CJP के प्रदर्शन और पत्रकारों की हिरासत

कॉकroach जनता पार्टी (CJP) नामक दबाव समूह ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक विरोध जारी रखने की घोषणा की। यह समूह पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है। शनिवार को जंतर-मंतर तक मार्च के उसके आह्वान के बाद दिल्ली में बड़े पैमाने पर पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए।

प्रशासन ने व्यापक प्रतिबंध लगाए। कई मेट्रो स्टेशन बंद किए गए और आवाजाही पर रोक के कारण प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने में मुश्किल हुई। गृह मंत्रालय ने अब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं देने की घोषणा की है। अनुमति मिलने की स्थिति में प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थानों का उल्लेख किया गया है।

CJP के संस्थापक अभिजीत दीकपे और सह-संयोजक सौरव दास तथा आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने पर विमान से हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। उन्हें अगले दिन रिहा कर दिया गया। बाद में दास और रांका ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विरोध जारी रखने की बात कही और पुलिस से प्रदर्शन की नई तारीख के लिए अनुमति मांगने की घोषणा की।

सप्ताहांत में पुलिस ने हजारों लोगों को हिरासत में लेकर बाद में रिहा किया। इनमें कई पत्रकार भी शामिल थे। कुछ वीडियो और तस्वीरों में पुलिसकर्मियों को प्रदर्शनकारियों को जबरन बसों में बैठाते हुए देखा गया। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एक पुलिसकर्मी ने बस के भीतर हिरासत में लिए गए एक प्रदर्शनकारी को थप्पड़ भी मारा। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया।

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने कम से कम 16 भारतीय पत्रकारों की हिरासत की निंदा की। संगठन ने कहा कि सार्वजनिक महत्व की घटनाओं की रिपोर्टिंग करना अपराध नहीं है।

इस बीच, राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल युवाओं के साथ मारपीट की गई। दूसरी ओर, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने विपक्ष और CJP पर विदेशी ताकतों के इशारे पर भारत को अस्थिर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कथित विदेशी ताकतों के बारे में कोई विवरण नहीं दिया।

इस पूरे विवाद से जुड़ी अहम बातें

  • राहुल गांधी ने मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की।

  • विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की, जबकि चुनाव आयोग और भाजपा ने आरोपों को खारिज किया।

  • दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान भारी सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रतिबंध और बड़े पैमाने पर हिरासत की घटनाएं सामने आईं।

  • पत्रकारों की हिरासत और प्रदर्शनकारियों के साथ कथित बल प्रयोग ने शांतिपूर्ण विरोध और प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े किए।

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर रहेगी नजर

इस मामले में अगला अहम घटनाक्रम अदालत की सुनवाई और मतदाता सूची संशोधन से जुड़े तथ्यों पर सामने आने वाली जानकारी होगी। विपक्ष की मांग है कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए, जबकि आरोपों की पुष्टि या खंडन संबंधित दस्तावेजों, जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकता है।

दिल्ली में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। प्रशासन की पाबंदियों और वैकल्पिक स्थानों की व्यवस्था के बीच यह देखना होगा कि विपक्ष और CJP आगे अपने विरोध प्रदर्शन किस तरह आयोजित करते हैं।

मतदाता सूची की विश्वसनीयता और शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार, दोनों लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े अहम मुद्दे हैं। आपके विचार में इस विवाद का समाधान पारदर्शी जांच से होना चाहिए या अदालत को पहले चुनाव आयोग की प्रक्रिया की समीक्षा करनी चाहिए?

Disclaimer

यह समाचार उपलब्ध रिपोर्टों और संबंधित पक्षों के बयानों पर आधारित है; इसमें उल्लिखित आरोपों को स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए और आगे के घटनाक्रम के अनुसार जानकारी बदल सकती है।

SRA
Ajay Kumar
Founder & Chief Editor • Story Real A

Investigative journalist and founder of Story Real A, focusing on public policy, national socioeconomic developments, governance, and grassroots reporting across India.

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